शुक्रवार, 13 नवंबर 2020

सूरज की तरह जगमगाओ

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कल समय की चाल पर भी राज करना,
कल निरुत्तर यह सारा संसार करना।
आज के दिन तुम लाजवाब हो जाओ,
आज तुम 'सूरज' की तरह जगमगाओ।।

कल विघ्नों के समक्ष भी तुम न झुकना,
कल मैं भी रोकूं तो बिल्कुल न रुकना।
आज के दिन तुम मेरे संग ठहर जाओ,
आज तुम 'सूरज' की तरह जगमगाओ।।

कल दुखों को सहज न स्वीकार लेना,
कल मेरे अस्तित्व को भी नकार देना।
आज के दिन मुझसे सारा प्यार पाओ,
आज तुम 'सूरज' की तरह जगमगाओ।।

कल तेज हवाओं के तुम पर कतरना,
कल आंधियों में भी सागर में उतरना।
आज के दिन तुम खुशी के दीप जलाओ,
आज तुम 'सूरज' की तरह जगमगाओ।।

दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं 
🎇🎆✨
link for video
👇
https://youtu.be/ZvBwquMuPYU
..............* सूरज मुजफ्फरनगरी

शुक्रवार, 28 अगस्त 2020

पिक्चर तो अभी बाकी है।

#JusticeForSSR पर कविता

14 जून 2020 को बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की खबर सामने आई थी। सुशांत ने आत्महत्या की थी या किसी ने उसकी हत्या की थी यह न्यायिक जांच का विषय है। परन्तु हर भारतीय यह जानना चाहता है कि आखिर सच क्या है ? अब बात सिर्फ सुशांत की हत्या या आत्महत्या की नहीं रही है बल्कि अब बात सत्य और असत्य की है। अब बात न्याय और अन्याय की है। अब बात षड़यंत्रों के दुस्साहस और भारतीय न्यायव्यवस्था में जनता के विश्वास की है। इसमें कोई संदेह नहीं कि जनशक्ति ने इस मामले को गंभीरता से उठाया है वर्ना ज्यादा पुरानी बात नहीं है कि महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की मोब लिंचिंग और दिशा सालियान की मौत की घटनाओं का परिणाम भी हमारे सामने है। मायानगरी मुंबई तो इससे पहले भी बहुत सी चीखों को दबा चुकी है। लोग तो यह भी कहते हैं कि ...

दिखाई नहीं देता मगर

शामिल ज़रुर होता है।

खुदकुशी करने वालों का भी

क़ातिल जरुर होता है।।

सुशांत में कुछ तो खास रहा होगा वर्ना पिक्चर कब की खत्म हो गई होती। ऐसा लगता है कि....

 "पिक्चर तो अभी बाकी है।"

तेरा अस्तित्व सूर्योदय सा है,
कातिलों का अंधेरी रात है।
जिंदा लोगों में नहीं मिलती,
तुझमें अभी भी वो बात है।।

ये मायानगरी दबा चुकी थी,
न जाने कितनी चींखों को ।
कुछ तो तुझमें खास है जो,
न दबा सकी तेरी खामोशी को।।
आक्रोश की ज्वाला जिसमें,
उम्मीद की वो मशाल है तू ।
झूठ की नींव हिला दी जिसने,
सच का वो भूचाल है तू ।।
तेरे कातिल खड़े अकेले हैं,
सारी दुनिया तेरे साथ है।
जिंदा लोगों में नहीं मिलती,
तुझमें अभी भी वो बात है।।

चहुंओर तेरे ही चर्चे हैं,
व्यर्थ नहीं तेरा बलिदान।
तेरे आगे आज सब फीके हैं,
क्या बादशाह? क्या सुल्तान?
ये मायानगरी भांप न पाई,
वक्त की ऐसी चाल है तू ।
परिवारवाद की छाती में,
शूल नहीं एक भाल है तू ।।
पिक्चर तो अभी बाकी है,
यह अंत नहीं, शुरुआत है।
जिंदा लोगों में नहीं मिलती,
तुझमें अभी भी वो बात है।।
......
#JusticeForSSR
* सूरज मुजफ्फरनगरी

शनिवार, 4 जुलाई 2020

गुरु-शिष्य संबंध

"गुरु पूर्णिमा" की पूर्व संध्या पर गुरुजनों के सम्मान में एक काव्य रचना...
............
दुनिया में कुछ ऐसे लोग,बोले अहंकार के बोल,
जैसे ज्ञानी उनके जैसा,  दूजा  कोई  नहीं  है।
और गुरु के प्रति जिस शिष्य के मन में आदर नहीं,
उसको तो जीवन में लक्ष्य, मिला कोई नहीं है।।

शिष्य गुरु बिन अधूरा, बिन शिष्य गुरु न पूरा,
गुरु-शिष्य जैसा संबंध, और कोई नहीं है।
ऊंच-नीच, जात-पात, भेदभाव से वो दूर,
गुरु की नजरों में, छोटा-बड़ा कोई नहीं है।।

विद्या का वो दान देता,सबको एक समान देता,
राजा हो या रंक,  खाली जाता कोई नहीं है।
मर्यादा पुरुषोत्तम होता,वो ही शिष्य गुरु होता,
बिना  शिष्य  बने, गुरु  होता  कोई  नहीं  है ।।

गुुुरुजनों का मान बढ़ाएं,हम चरणों में शीश झुकाएं,
गुरु की सेवा से बढ़कर, पूजा कोई नहीं है।
और क्यूं ना मन में 'सूरज' चाहे,अच्छा शिष्य ही बन जाए,
अच्छा गुरु ना भी बने,  गिला कोई नहीं है।।

ये दुनिया है मझधार, सबके  हितैषी  हजार,
लेकिन  कर्णधार  गुरु  जैसा  कोई  नहीं  है।
माना एक से बढ़कर एक, दुनिया में हैं फनकार,
लेकिन  शिल्पकार  गुरु  जैसा  कोई  नहीं है।।२
.....
सभी गुरुजनों को सादर प्रणाम 🙏
.....
* Suraj Muzaffarnagary

शनिवार, 30 मई 2020

छः साल और चौकीदार

               छः साल और #चौकीदार
.........................................................
  #सर्जिकल_स्ट्राइक , दुश्मन पर वार,
 छः साल और #चौकीदार
  #उज्जवला ,  अब न बहे अश्रु की धार,
 छः साल और #चौकीदार
  #नोटबंदी    पंक्ति में शाही परिवार,
 छः साल और #चौकीदार
  #धारा370 ,   कश्मीर पर पूर्ण अधिकार,
 छः साल और #चौकीदार
  #तीनतलाक , शाहबानो सी सब हकदार,
 छः साल और #चौकीदार
  #राममंदिर ,   भक्तों का सपना साकार,
 छः साल और #चौकीदार
  #सीएए ,       नागरिकता का अधिकार,
 छः साल और #चौकीदार
  #एनआरसी , घुसपैठ पर करारा प्रहार,
 छः साल और #चौकीदार
  #एनपीआर , थर-थर कांप गए गद्दार,
 छः साल और #चौकीदार
  #देशभक्ति भारत माता करे पुकार,
 हर बार कोई  #चौकीदार
...............................................................
 *  surajmzn.blogspot.com

रविवार, 5 अप्रैल 2020

नौ बजे नौ मिनट

आज रात नौ बजे नौ मिनट
मनाओ दिवाली नौ मिनट

जलाओ दीप सतर्कता के
और फ्लैश लाइट ज्ञान की,
यह अस्तित्व का प्रश्न है!
और परीक्षा है विज्ञान की,,
माना कि संकट है विकट
हम जीत की कर बैठे हठ

आज रात नौ बजे नौ मिनट
मनाओ दिवाली नौ मिनट

जलाओ टॉर्च परोपकार की
और मोमबत्तियां संयम की,
हम विवेक से काम लेंगे
और हरा देंगे सेना 'तम' की,,
'कोरोना' का काटो टिकट
हम जीत के बिल्कुल निकट

आज रात नौ बजे नौ मिनट
मनाओ दिवाली नौ मिनट...2

*सूरज मुजफ्फरनगरी
*नोट: कोरोना महामारी के विरुद्ध एकजुटता दिखाने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने लोगों से अपील की है कि रविवार 05 अप्रैल 2020 को सभी देशवासी रात नौ बजे अपने घर की सभी लाइटें बंद करके,अपने घर के दरवाजे या बालकनी में खड़े होकर 9 मिनट के लिए दीप, मोमबत्ती, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर दिवाली की तरह प्रकाश का अनुभव करें। यह इस बात का प्रतीक होगा कि कोरोना महामारी के खिलाफ इस लड़ाई में कोई अकेला नहीं है। चारों तरफ जब हर व्यक्ति एक-एक दीप जलाएगा तो प्रकाश की महाशक्ति के बीच हम सब अपने मन में संकल्प करें कि हम अकेले नहीं हैं। हम सब साथ हैं।

सोमवार, 23 मार्च 2020

शायरी_दिल_से


तकनीकी के इस दौर में मन शांत नहीं है।
हर आदमी अकेला है पर एकांत नहीं है।।...1
23/03/2020  6:43 pm

भरोसा खुद पर, ज़हान पर नहीं।
बंदिशें कदमों पर, मुस्कान पर नहीं।।
28/04/2020  9:04 am
...

बाप-बच्चों का रिश्ता कितना खास होता है ?
ये बाप के चले जाने पर ही अहसास होता है।
बच्चे आसमां भी छू लें तो बाप से बड़े नहीं हो सकते,
बच्चे बच्चे होते हैं , बाप बाप होता है।
07/05/2023   6:23 pm
...

In progress...

शनिवार, 21 मार्च 2020

कोरोना की chain तोड़ो


सभी देशवासियों को सूरज मुजफ्फरनगरी का सादर नमस्कार ! साथियों आज पूरी दुनिया 'कोरोना महामारी' से जूझ रही है। इस संदर्भ में बहुत से लोग अपने-अपने तरीकों से लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए 'कोरोना संकट' पर लोगों को जागरूक करने के लिए अमिताभ बच्चन जी द्वारा अभिनीत फिल्मी गीत 'मेरे देशप्रेमियों' को सम्पादित कर एक गीत लिखा है।
......................

कोरोना की chain तोड़ो,
कोई मिले तो हाथ ही जोड़ो,
भीड़ के पीछे मत दौड़ो,
सावधानी ही सुरक्षा है देश प्रेमियों
देश प्रेमियों
हाथों को clean करो देश प्रेमियों।
मेरे देश प्रेमियों
हाथों को clean करो देश प्रेमियों।

देखो, कोरोना चुपके से आता है।
सोचो, ये वक्त क्या हमसे चाहता है ?
जब भी घर से बाहर निकलो
मुंह पर mask लगा लेना,
कुछ नियमों का पालन करके
सबकी जान बचा लेना,,
लोगों को जागरूक करो।
मेरे देश प्रेमियों
हाथों को clean करो देश प्रेमियों ।
मेरे देश प्रेमियों
हाथों को clean करो देश प्रेमियों ।


साबुन, पानी से हाथों को धो लो।
जब भी कुछ बोलो, दूर से ही बोलो।
फैल न जाए infection
हमें बचना है अनहोनी से,
छींकों, खांसो तो ढक लेना
मुंह को अपनी कोहनी से,,
Sanitizer use करो।
मेरे देश प्रेमियों
हाथों को clean करो देश प्रेमियों ।
मेरे देश प्रेमियों
हाथों को clean करो देश प्रेमियों ।


छोड़ो यात्राएं अभी मस्ती की,मौजों की।
रोको सब राहें इस virus की फौजों की।
पूरब-पच्छिम-उत्तर-दक्षिण
में फैला कोरोना है,
इंसानों के इस दुश्मन को
कुछ इस तरह धोना है,,
घर पर विश्राम करो।
मेरे देश प्रेमियों
हाथों को clean करो देश प्रेमियों ।
मेरे देश प्रेमियों
हाथों को clean करो देश प्रेमियों ।


* जय हिन्द, वंदे मातरम्  🙏
   सूरज मुजफ्फरनगरी
surajmzn13@gmail.com

रविवार, 1 मार्च 2020

ये भारत की नारी है... "नारी_सशक्तिकरण"

नमस्कार !आज की काव्य रचना का विषय है 'नारी सशक्तिकरण'।
नारी सशक्तिकरण अर्थात जीवन के हर क्षेत्र में नारियों को सशक्त बनाना, सक्षम बनाना। चूंकि नारी सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है तो इसका मतलब कहीं न कहीं हमने यह मान लिया है कि भारत की नारियां अभी पूर्ण रूप से सशक्त नहीं है। सोचने वाली बात है कि भारत में हजारों सालों से नारियों की पूजा की जाती है, फिर भी नारी सशक्त नहीं है तो ये चिंता की बात है। लेकिन मेरा व्यक्तिगत रूप से यह मानना है कि भारत की नारियां पहले भी सशक्त थी और आज भी सशक्त हैं।भारत की नारियां किसी भी क्षेत्र में पुरूषों से कम सशक्त नहीं हैं।
इस काव्य रचना की प्रत्येक पंक्ति में एक नाम है,उस नाम से जुड़ा एक महत्वपूर्ण शब्द है, एक कहानी है, एक सच्चाई है और एक अच्छी तुकबंदी है जिससे काव्य रचना देखने में भी अच्छी लगती है।
शीर्षक है...
"ये भारत की नारी है।"
............................
ये भारत की नारी है।
ये कष्टों से नहीं हारी है।
ये त्याग,समर्पण,ममता है।
ये पूजा की अधिकारी है।
ये गंगा जल सी निर्मल है।
ये ज्वाला सी बलकारी है।
ये निर्बल, लाचार नहीं है।
ये दुर्गा अवतारी है।

ये सीता की कुर्बानी है।
ये झांसी की मर्दानी है।
ये पन्ना का त्याग है।
ये हाडी बलिदानी है।
ये विद्योतमा ज्ञानी है।
ये दुर्गा की खुद्दारी है।

ये भारत की नारी है।
ये कष्टों से नहीं हारी है।
ये त्याग,समर्पण,ममता है।
ये पूजा की अधिकारी है।

ये सावित्री का तप है।
ये अनुसूया की पावनता है।
ये संयम फुले का है।
ये मदर टेरेसा की ममता है।
ये महाराणा की चंपा है।
ये झांसी की झलकारी है।

ये भारत की नारी है।
ये कष्टों से नहीं हारी है।
ये त्याग,समर्पण,ममता है।
ये पूजा की अधिकारी है।

ये राधा का प्रेम है।
ये मीरा की भक्ति है।
ये सारंधा की हिम्मत है।
ये चेन्नमा की शक्ति है।
ये पद्मिनी का जौहर है।
ये उदा की चिंगारी है।

ये भारत की नारी है।
ये कष्टों से नहीं हारी है।
ये त्याग,समर्पण,ममता है।
ये पूजा की अधिकारी है।

ये उज्जवला का सागर है।
ये मीठा स्वर लता का है।
ये कल्पना का अम्बर है।
ये प्रेमलता की पताका है।
ये हिमा की रफ्तार है।
ये अवनि की सवारी है।

ये भारत की नारी है।
ये कष्टों से नहीं हारी है।
ये त्याग,समर्पण,ममता है।
ये पूजा की अधिकारी है।

ये मैरिकॉम का मुक्का है‌।
ये कर्णम का दम पक्का है।
ये बबीता का बल है।
ये हरमन का छक्का है।
ये सिंधु का जज्बा है।
ये दीपा की तैयारी है।

ये भारत की नारी है।
ये कष्टों से नहीं हारी है।
ये त्याग,समर्पण,ममता है।
ये पूजा की अधिकारी है।

ये भंवरी का भूचाल है।
ये बानो का हक बाकी है
ये रंग गुलाबी संपत का है।
ये किरण की खाकी है।
ये निर्भया की चींखें हैं।
ये लक्ष्मी का ग़म भारी है।

ये भारत की नारी है।
ये कष्टों से नहीं हारी है।
ये त्याग,समर्पण,ममता है।
ये पूजा की अधिकारी है।
ये भारत की नारी है।
ये व्यवस्था की मारी है।
ये सशक्तिकरण तो संघर्ष है।
ये संघर्ष अभी भी जारी है।

जय हिन्द ! जय भारत ! 🙏
*सूरज मुजफ्फरनगरी

सहायतार्थ :
*विद्योतमा_ महाकवि कालिदास की पत्नी और गुरु
*दुर्गा की खुद्दारी_ रानी दुर्गावती की खुद्दारी
*फुले_ सावित्री बाई फुले
*दीपा_ दीपा कर्माकर
*उज्जवला_उज्जवला पाटिल (नौकायन)
*प्रेमलता_पर्वतारोही प्रेमलता अग्रवाल
*अवनि_अवनि चतुर्वेदी
*लक्ष्मी_लक्ष्मी अग्रवाल(तेजाब कांड पीड़ित)

बुधवार, 5 फ़रवरी 2020

मोदी का मान...

सभी देशवासियों को "सूरज मुजफ्फरनगरी" का सप्रेम नमस्कार।
साथियों! इसमें कोई दोराय नहीं है कि पिछले कुछ सालों में भारतीय राजनीति का नैतिक स्तर बहुत गिरा है। बड़े-बड़े नेता भी छोटी-छोटी बातें करने लगे हैं और जिस तरह से अपशब्दों का प्रयोग कर रहे हैं उससे भारत के भविष्य को लेकर एक आम भारतीय नागरिक का चिंतित होना लाजिमी है। दुःख की बात यह है कि अपशब्दों के सबसे ज्यादा तीर भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी को निशाना बनाकर छोड़े जाते हैं। कुछ नेता भारत के प्रधानमंत्री का सम्मान नहीं करना चाहते तो कम-से-कम अपमान भी न करें। शब्दों की मर्यादा बनाए रख सकते हैं या कम-से-कम प्रधानमंत्री पद की गरिमा का तो ख्याल रख ही सकते हैं। मोदी जी 'मन की बात' करते हैैं लेकिन आज हम उनके 'मान' की बात करते हैं।


      "मोदी का मान"
मेरे देशवासियों लाज रखो
कुछ तो मोदी के मान की...२
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की,,

( वर्तमान हालात )
रण बीच अकैला मोदी है
दुश्मन खड़े हैं लाखों में,
इस पर भी तुम आ जाते हो
क्यूं गैरों की बातों में ?
रण में छोड़ चले अपनों को
भारत का दस्तूर नहीं ,
साथ निभाया जाता है
युद्ध भरे हालातों में ।।
कहां गए वो नारें जिनसे...२
सुभाषचंद्र की शान थी ,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की ,,

मेरे देशवासियों....स्वाभिमान की,,

( अपशब्द )
जिनको भाले चुभ जाते हैं
जरा-जरा से कथनों से ,
वे भी कोसते हैं मोदी को
ज़हरीले ही वचनों से ।
किसका शीशमहल हड़पा है
मोदी ने बतलाओ तो ,
देश की खातिर भिड़ा है
मोदी आतंकी संगठनों से।।
कहां गए वो गीत जिनमें...२
भगत सिंह की जान थी ,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की ,,

मेरे देशवासियों....स्वाभिमान की,,

( पत्थरबाजी )
जो तुम्हें सुरक्षा देते हैं
उन पर पत्थर बरसाते हो ,
फिर इसे वीरता कहते हो
भाई!कौन-सा आटा खाते हो ?
क्यूं आगजनी करते हो भाई ?
अपना ही तो देश है ,
वो काश्मीर को ले आया
तुम प्याज़ टमाटर गाते हो ।।
क्या तुमने नहीं पढी कहानी...२
गुल गुलशन गुलफाम की ,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की ,,

मेरे देशवासियों....स्वाभिमान की,,

( सर्जिकल स्ट्राइक )
क्या पैट्रोल और सोना-चांदी
इज्जत से भी प्यारे हैं ,
जो शरहद पर लड़ते हैं
वे भी तो भाई हमारे हैं ।
भूल गए उन दरबारों को
जो बस निंदा करते थे ,
भूल गए मोदी ने दुश्मन
घर में घुस के मारे हैं ।।
कीमत चुका नहीं सकता...२
कोई सेना के बलिदान की ,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की ,,

मेरे देशवासियों....स्वाभिमान की,,

( भेदभाव )
क्या मोदी के जाने से
तुम कोहिनूर ले आओगे ?
अब तो आंखें खोलो भाई,
वर्ना फिर पछताओगे ।
जाति-धर्म और ऊंच-नीच की
नादानी को छोड़ दो ,
तुम बुद्धू तो हो नहीं
जो लौट के घर को आओगे।।
करते रहना फिर भरपाई...२
सदियों तक नुकसान की ,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की ,,

मेरे देशवासियों....स्वाभिमान की,,

( राजतंत्र )
कैसे एक चाय वाले ने
शासन को कब्जाया है !
सांप लोट रहे छाती पर
सिर पर आकाश उठाया है।
मोदी को ये राजपाट तो
खुद जनता ने सौंपा है ,
ये भारत देश सभी का है
सबने ही इसे बनाया है ।।
ये पुश्तैनी जागीर नहीं है...२
नेहरू की संतान की ,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की ,,

मेरे देशवासियों....स्वाभिमान की,,

( भ्रष्टाचार )
क्या भ्रष्टाचार की बीमारी से
इतने ज्यादा पीड़ित हैं ,
ज़मीर हमारे मर चुके और
सोच रहे हैं जीवित हैं ।
नश्ले हमारी भुगतेगी
एक हम ही नहीं पछताएंगे ,
देशप्रेम को भूल चुके
रोजी-रोटी तक सीमित हैं।।
कहां गई वो घास की रोटी...२
राणा के अभिमान की ,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की ,,

मेरे देशवासियों....स्वाभिमान की,,

( विकास )
क्या तुमने कोई एलपीजी की
खड़ा कतार में देखा है ,
या फिर नोट पांच सौ वाला
नकली कह के फेंका है ।
मोदी की तो इच्छा है
सबकी थाली में रोटी हो ,
या टुकड़े चबा-चबा के
देने का भी उस पे ठेका है ?
मेहनत से कोई शान नहीं...२
घट जाती है इंसान की ,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की ,,

मेरे देशवासियों....स्वाभिमान की,,

( राममंदिर )
वो भी दिन थे जब आतंकी
दिल्ली तक आ जाते थे ,
भूल गए क्या दुनिया वाले
खिल्ली बहुत उड़ाते थे ।
मंदिर वहीं बनायेंगे
कहते-कहते दम सूखा था ,
तिरपाल में देख राम को
आंसू ही टपकाते थे ।।
मोदी ने तिरपाल हटाई...२
हम सबके भगवान की ,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की ,,

मेरे देशवासियों....स्वाभिमान की,,

( तीन तलाक़ )
एक तरफ व्यवस्था थी और
एक तरफ थी शाहबानो ,
मानवता की हत्या थी वो
तुम मानो या ना मानो ।
किसने एक बूढ़ी अम्मा से
न्याय तलक भी छीन लिया ,
देशवासियों पढ लो किस्सा
और हकीकत पहचानो।।
मोदी ने तो लाज रखी है...२
चली गई उस जान की,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की ,,

मेरे देशवासियों....स्वाभिमान की,,

( वंशवाद )
कुछ ऐसे भी घर हैं जिनमें
नेता पैदा होते हैं ,
क्या मोदी ने तुम पर अपने
भाई-भतीजे थोपें है ?
तुमने तो सत्ता में झेले
कईं अंगूठा छाप भी ,
कुछ ऐसे भी आए जिन्होंने
पीठ में खंजर घोंपे हैं ।।
ऐसे नेताओं को चिंता...२
बस अपनी दुकान की ,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की ,,

मेरे देशवासियों....स्वाभिमान की,,

( एनआरसी )
'एनआरसी' आये न आये
मोदी का क्या जाता है ?
भावी पीढ़ी रहे सुरिक्षत
इतना ही तो चाहता है ।
एक सौ पैंतीस करोड़ भी
क्या तुमको ज्यादा नहीं लगते ,
फिर से धोखा खाओगे
ये इतिहास बतलाता है ।।
क्यूं घर में सजा रहे अलमारी..२
मौत के सामान की ,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की ,,

मेरे देशवासियों....स्वाभिमान की,,

( एनपीआर )
बड़े-बड़े नेता और ज्ञानी
लोगों को भरमाते हैं,
हम कागज नहीं दिखाएंगे
सड़कों पर चिल्लाते हैं।
देशवासियों बच के रहना
उनकी नीयत ठीक नहीं,
जो अमेरिका के एयरपोर्ट पर
चड्डी तक दिखलाते हैं।।
बिन कागज पहचान नहीं है..२
दुनिया में इंसान की,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की ,,

मेरे देशवासियों....स्वाभिमान की,,

( सीएए )
मोदी ने तो उनकी पीड़ा
सुनी भी है,महसूस भी की,
शरणार्थी शिविरों में जाकर
तुम भी सुन लो दास्तां।
गद्दारों के झांसे में आकर
जो आपा खो बैठे,
'सीएए' का उन सब से
न मतलब है न वास्ता।।
आंखों पर बांधी है जो...२
खोलो पट्टी अज्ञान की,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की ,,

मेरे देशवासियों....स्वाभिमान की,,

( आतंकवाद )
शायद लगते होंगे वे सब
मोदी की फिराक में ,
भूखे भेड़िए नजर गड़ाए
बैठे हैं जो ताक में ।
मोदी तो बस राह में उनकी
खड़ी हुई दीवार है ,
मकसद तो है किसी तरह
मिल जाए भारत खाक में।।
कुछ बच्चों की फिक्र करो...२
कुछ अपने हिंदुस्तान की ,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की ,,

मेरे देशवासियों....स्वाभिमान की,,

( राष्ट्रवाद )
भला-बुरा न सोच सके
क्या हम इतने अज्ञानी हैं ,
देश-धर्म को भूल चुके हैं
या इतने अभिमानी है ।
अपने अंतर्मन से सच
कहने की हिम्मत नहीं रखते ,
स्वार्थ में आंखें फेरी है या
खून हो चला पानी है ।।
कहां गई वो अंतिम गोली...२
आजाद के स्वाभिमान की ,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की ,,

मेरे देशवासियों....स्वाभिमान की,,

( चौकीदार )
मोदी से क्या छीनोगे
वह तो एक चौकीदार है ,
चौकीदार को चोर
समझने वालों पर धिक्कार है।
चलो मान लेते हैं भाई
मोदी ने नहीं काम किया ,
क्यूं दुश्मन थरथर कांप रहे ?
क्यूं डरे हुए गद्दार है ?
क्यूं दुनिया में बज रही है...२
तूती मोदी के ही नाम की ,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की ,,

मेरे देशवासियों....स्वाभिमान की,,

( धारा370 )
एक बार कह कर तो देखो
मोदी हम तेरे साथ हैं ,
भारत मां को आंख दिखाएं
फिर किसकी औकात है।
भूल बड़ी थी 'तीन सौ सत्तर'
हो गई थी अनजाने में ,
जिसने भूल सुधारी उसमें
कुछ न कुछ तो बात है ।।
लाज रखो कुछ तिरंगे की...२
आन-बान-शान की ,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की ,,

मेरे देशवासियों लाज रखो
कुछ तो मोदी के मान की,
मोदी ने ही लाज रखी है
देश के स्वाभिमान की,,

'जय हिंद' 'वंदे मातरम्'...
*नोट_काव्य रचना को विडियो में देखने के लिए नीचे दिये गए लिंक को सलेक्ट कर यूूूूट्यूब पर सर्च करें।
https://youtu.be/goZL8PfCtv4

* सूरज मुजफ्फरनगरी

शनिवार, 1 फ़रवरी 2020

मेरी हैसियत...

माना कि तुम्हारे दिल में है प्यार बहुत..२
मगर मेरे दिल में भी कमी नहीं है।
सच तो यह है कि प्यार किसी एक की
मिल्कियत ही नहीं है।
जो नहीं है उसको भूल जा...२
जो है उससे प्यार कर ।
है दुनिया में खुशी का राज यही
असलियत भी यही है।
एक पल का भी भरोसा नहीं है...२
तुझको तो फिर भी बरसों की आस है।
तेरे ही दिल में छिपा है वो
जिसकी तुझको तलाश है।
सिर्फ एक खुशी है वो...२
और कुछ भी नहीं है।
और तेरी एक खुशी के लिए
मैं बस अपनी जान दे सकता हूं।
इससे ज्यादा "मेरी हैसियत" भी नहीं है।।

*सूरज मुजफ्फरनगरी

बुधवार, 22 जनवरी 2020

'कोई मतदान कहता है...'

कोई मतदान कहता है
कोई हथियार समझता है।
मतदाता नासमझ नहीं अब
समय की धार समझता है।।
अहमियत कितनी होती है
चुनाव में मतदान की।
किसान, मजदूर समझता है
या बेरोजगार समझता है।।

मतदाता घर में बैठेगा
तो कुछ हो नहीं सकता।
फसल कैसे वो काटेगा
बीज जो बो नहीं सकता।।
चंद सिक्कों की खातिर
अपना मत जो बेच देते हैं।
भविष्य उनके बच्चों का
स्वर्णिम हो नहीं सकता।।

लोकतंत्र में चुनाव की
व्यवस्था बहुत पुरानी है।
भारत के लोकतंत्र की शान
जो दुनिया में बढ़ानी है।।
तो मतदान केंद्र पर जाकर
तुम मतदान कर देना।
यह भी एक देशभक्ति है
जो हम सबको निभानी है।।

*सूरज मुजफ्फरनगरी

शुक्रवार, 17 जनवरी 2020

" परिवेश को साफ रखेंगे "


अपने प्यारे भारत को
फिर से स्वर्ग बना लेंगे,
परिवेश को साफ रखेंगे
नहीं गंदगी पालेंगे ,,

देख गंदगी, झाड़ू को ही
हम हथियार बना लेंगे ,
परिवेश को साफ रखेंगे
नहीं गंदगी पालेंगे ,,

कूड़ा जब भी डालेंगे
कूड़ेदान में डालेंगे ,
परिवेश को साफ रखेंगे
नहीं गंदगी पालेंगे ,,

अपने घर-आंगन को भी
साफ-स्वच्छ बना लेंगे ,
परिवेश को साफ रखेंगे
नहीं गंदगी पालेंगे ,,

जो भी देगा पॉलिथीन में
उसकी चीजें ना लेंगे ,
परिवेश को साफ रखेंगे
नहीं गंदगी पालेंगे ,,

शुद्ध हवा हो चारों ओर
इतने पेड़ लगा लेंगे ,
परिवेश को साफ रखेंगे
नहीं गंदगी पालेंगे ,,

गंदे-बुरे विचारों से भी
अपना ध्यान हटा लेंगे ,
परिवेश को साफ रखेंगे
नहीं गंदगी पालेंगे ,,

नहीं जागरुक हैं जो लोग
उनको भी समझा लेंगे ,
परिवेश को साफ रखेंगे
नहीं गंदगी पालेंगे ,,

स्वच्छ भारत अभियान को
जीवन में अपना लेंगे ,,
परिवेश को साफ रखेंगे
नहीं गंदगी पालेंगे ,,

*सूरज मुजफ्फरनगरी

मंगलवार, 14 जनवरी 2020

सेना रक्षक है भारत की आन-बान-शान की

सेना रक्षक है भारत की
आन-बान-शान की,
कीमत चुका नहीं सकते हम
सेना के बलिदान की,,

नेताओं पर फूल बरसते
और सेना पर पत्थर...2
चैन से घर में सोते हैं हम
सैनिकों के दम पर
हमको वो मुस्कान है देते
बारूद में जलकर
जिसको जरा भी शक हो
देखे कश्मीर में चलकर
घाटी गवाह है...2
सेना के बलिदान की,
कीमत चुका नहीं सकते हम
सेना के बलिदान की,,

घात लगा करके ही गीदड़
शेरों से टकराते हैं
देख के ऐसे मंज़र शोले
आंखों में भर आते हैं
नेताओं की आंखों में तो
आंसू भी नहीं आते हैं
बहुत सह लिया हम सब ने
अब बांध सब्र के जाते हैं
किसको फिक्र है...2
सेना के बलिदान की,
कीमत चुका नहीं सकते हम
सेना के बलिदान की,,

जब निंदा करने की
सीमा को दिल्ली लांघेगी
जब सेना को हुकुम मिलेगा
जब दिल्ली जागेगी
जब सेना आतंकियों को
चौराहों पर टांगेगी
सिर पर रखकर पैर यहां से
तब दहशत भागेगी
कीमत चुकेगी तब...2
सेना के बलिदान की,
सेना रक्षक है भारत की
आन-बान-शान की,,

सेना रक्षक है भारत की
आन-बान-शान की,
कीमत चुका नहीं सकते हम
सेना के बलिदान की,,

* सूरज मुजफ्फरनगरी

रविवार, 12 जनवरी 2020

चलो आज मिलकर साथ

चलो आज मिलकर साथ
हम करते हैं ये काम ।

ठहरा गंदा पानी सुखा दें
कूड़ा-करकट हटा दें
साफ-सफाई करके
गंदगी को मिटा दें
चलो आज मिलकर साथ
हम करते हैं ये काम ।

वातावरण को साफ करें
पेड़ पौधे लगा दें
प्रदूषण को मिटाकर
भारत को स्वच्छ बना दें
चलो आज मिलकर साथ
हम करते हैं ये काम ।

* सूरज मुजफ्फरनगरी

शनिवार, 11 जनवरी 2020

"मोदी है तो मुमकिन है..."

भारत माता बंधी हुई थी
लोहे की जंजीरों में ।
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में ।। 

हम अपने ही देश में
परदेसी कहलाते थे,
दुनिया हम पर हंसती थी
दुश्मन भी खुशी मनाते थे,,
काश्मीर की घाटी से तो
अमन-चैन को छीना ही,
लालकिले की प्राचीर से
हक भी छीनें जाते थे,,
मांओं से बेटे छीन लिए
सरहद पर खींची लकीरों ने,
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में,,
भारत माता बंधी हुई थी 
लोहे की जंजीरों में । 
आंसू-आंसू भरे हुए थे 
भारत की तस्वीरों में ।। 
जाति-धर्म के नाम पर
नफरत की फसल उगाते थे,
सेना के भी शौर्य पर
उंगली बहुत उठाते थे,,
आतंकी के प्रेम में
रात को दिन करने वाले,
आतंकी की मौत पर
मातम बहुत मनाते थे,,
कईं बरस तो राज किया
भारत पर मूक-बधिरों ने,
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में,,
भारत माता बंधी हुई थी
लोहे की जंजीरों में ।
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में ।। 

भारत मां के शेरों को
चूहें भी आंख दिखाते थे,
हाथों में बंदूकें थी पर
गोली नहीं चलाते थे,,
सीने में आवेश तो था पर
दिल्ली का आदेश न था,
देख के ऐसे मंजर हम भी
दांत भींच रह जाते थे,,
म्यान के अंदर समय बिताया
तेजधार शमशीरों ने,
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में,,
भारत माता बंधी हुई थी
लोहे की जंजीरों में ।
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में ।। 

जिनके कदमों की थाप से
पर्वत तक हिल जाते थे,
गद्दारों की शह पर वो
धोखे से मारे जाते थे,,
निंदा करने की नौटंकी
जब दिल्ली में होती थी,
दिलों में शोले उठते थे पर
आंखों से बह जाते थे,,
घाटी अपने लहू से
सींची है भारत के वीरों ने,
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में,,
भारत माता बंधी हुई थी 
लोहे की जंजीरों में । 
आंसू-आंसू भरे हुए थे 
भारत की तस्वीरों में ।। 
काश्मीर के नियम बदलना
इतना भी मुश्किल न था,
पर दिल्ली के दरबारों में
हिम्मतवाला दिल न था,,
गद्दारों से प्यार किया और
अपनों से मुंह मोड़ लिया,
बेघर लोगों की कोई
सुनने वाला दरियादिल न था,,
हिम्मत में कोताही बरती
दिल्ली के वजीरों ने,
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में,,
भारत माता बंधी हुई थी
लोहे की जंजीरों में ।
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में ।। 

लेकिन अब ये लगता है
तकदीर बदलना मुमकिन है,
काश्मीर की घाटी की
तस्वीर बदलना मुमकिन है,,
370, 35-ए की बेड़ियां
भी अब टूट चुकी है,
नामुमकिन सा काम था ये
पर 'मोदी है तो मुमकिन है',,
शहजादों से नहीं हुआ तो
थामा देश फकीरों ने,
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में,,
भारत माता बंधी हुई थी
लोहे की जंजीरों में ।
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में ।। 

शुक्रवार, 3 जनवरी 2020

हम देखेंगे , तुम देखना...

तुम देखना, हम देखेंगे ,
हम देखेंगे , तुम देखना ,,...४

जब 'बर्बादी' चिल्लाने वाले 
वंदे मातरम् गाएंगे ,
और तुष्टिकरण करने वाले
नेता भी खैर मनाएंगे ,,
तुम देखना...
तुम देखना, हम देखेंगे ,
हम देखेंगे , तुम देखना ,,...२

जब भारत मां पर उठने वाले
हाथ उखाड़े जाएंगे ,
और ताज के लोभी जयचदों के
शीश उखाड़े जाएंगे ,,
तुम देखना...
तुम देखना, हम देखेंगे ,
हम देखेंगे , तुम देखना ,,...२

जब साजिश रचने वालों के
सीने फाड़े जाएंगे ,
और मातृभूमि को बेचने वाले
जमीं में गाड़े जाएंगे ,,
तुम देखना...
तुम देखना, हम देखेंगे ,
हम देखेंगे , तुम देखना ,,...२

जब दहशत फैलाने वाले
आग में झोंके जाएंगे ,
और दहशतगर्दों के आका भी
घरों में ठोके जाएंगे ,,

तुम देखना...
तुम देखना, हम देखेंगे ,
हम देखेंगे , तुम देखना ,,...२

जब आतंकियों के पाँव तले से
जमीं खिसकती जायेगी ,
और गद्दारों के अरमानों पर
बिजली सी गिर जायेगी ,,
तुम देखना...
तुम देखना, हम देखेंगे ,
हम देखेंगे , तुम देखना ,,...२

जब देश के टुकड़े बोलने वाले
मुंह पर चांटे खाएंगे ,

और 'तिरंगा' रौंदने वाले
पैर भी काटे जाएंगे ,,

तुम देखना...
तुम देखना, हम देखेंगे ,
हम देखेंगे , तुम देखना ,,...२

जब दुश्मनों के मंसूबों पर
पानी सा फिर जाएगा ,
और भारत की भूमि पर
रामराज फिर आएगा ,,
तुम देखना...
तुम देखना, हम देखेंगे ,
हम देखेंगे , तुम देखना ,,...४

* सूरज मुजफ्फरनगरी