कोई मतदान कहता है
कोई हथियार समझता है।
मतदाता नासमझ नहीं अब
समय की धार समझता है।।
अहमियत कितनी होती है
चुनाव में मतदान की।
किसान, मजदूर समझता है
या बेरोजगार समझता है।।
मतदाता घर में बैठेगा
तो कुछ हो नहीं सकता।
फसल कैसे वो काटेगा
बीज जो बो नहीं सकता।।
चंद सिक्कों की खातिर
अपना मत जो बेच देते हैं।
भविष्य उनके बच्चों का
स्वर्णिम हो नहीं सकता।।
लोकतंत्र में चुनाव की
व्यवस्था बहुत पुरानी है।
भारत के लोकतंत्र की शान
जो दुनिया में बढ़ानी है।।
तो मतदान केंद्र पर जाकर
तुम मतदान कर देना।
यह भी एक देशभक्ति है
जो हम सबको निभानी है।।
*सूरज मुजफ्फरनगरी
कोई हथियार समझता है।
मतदाता नासमझ नहीं अब
समय की धार समझता है।।
अहमियत कितनी होती है
चुनाव में मतदान की।
किसान, मजदूर समझता है
या बेरोजगार समझता है।।
मतदाता घर में बैठेगा
तो कुछ हो नहीं सकता।
फसल कैसे वो काटेगा
बीज जो बो नहीं सकता।।
चंद सिक्कों की खातिर
अपना मत जो बेच देते हैं।
भविष्य उनके बच्चों का
स्वर्णिम हो नहीं सकता।।
लोकतंत्र में चुनाव की
व्यवस्था बहुत पुरानी है।
भारत के लोकतंत्र की शान
जो दुनिया में बढ़ानी है।।
तो मतदान केंद्र पर जाकर
तुम मतदान कर देना।
यह भी एक देशभक्ति है
जो हम सबको निभानी है।।
*सूरज मुजफ्फरनगरी