बुधवार, 22 जनवरी 2020

'कोई मतदान कहता है...'

कोई मतदान कहता है
कोई हथियार समझता है।
मतदाता नासमझ नहीं अब
समय की धार समझता है।।
अहमियत कितनी होती है
चुनाव में मतदान की।
किसान, मजदूर समझता है
या बेरोजगार समझता है।।

मतदाता घर में बैठेगा
तो कुछ हो नहीं सकता।
फसल कैसे वो काटेगा
बीज जो बो नहीं सकता।।
चंद सिक्कों की खातिर
अपना मत जो बेच देते हैं।
भविष्य उनके बच्चों का
स्वर्णिम हो नहीं सकता।।

लोकतंत्र में चुनाव की
व्यवस्था बहुत पुरानी है।
भारत के लोकतंत्र की शान
जो दुनिया में बढ़ानी है।।
तो मतदान केंद्र पर जाकर
तुम मतदान कर देना।
यह भी एक देशभक्ति है
जो हम सबको निभानी है।।

*सूरज मुजफ्फरनगरी

शुक्रवार, 17 जनवरी 2020

" परिवेश को साफ रखेंगे "


अपने प्यारे भारत को
फिर से स्वर्ग बना लेंगे,
परिवेश को साफ रखेंगे
नहीं गंदगी पालेंगे ,,

देख गंदगी, झाड़ू को ही
हम हथियार बना लेंगे ,
परिवेश को साफ रखेंगे
नहीं गंदगी पालेंगे ,,

कूड़ा जब भी डालेंगे
कूड़ेदान में डालेंगे ,
परिवेश को साफ रखेंगे
नहीं गंदगी पालेंगे ,,

अपने घर-आंगन को भी
साफ-स्वच्छ बना लेंगे ,
परिवेश को साफ रखेंगे
नहीं गंदगी पालेंगे ,,

जो भी देगा पॉलिथीन में
उसकी चीजें ना लेंगे ,
परिवेश को साफ रखेंगे
नहीं गंदगी पालेंगे ,,

शुद्ध हवा हो चारों ओर
इतने पेड़ लगा लेंगे ,
परिवेश को साफ रखेंगे
नहीं गंदगी पालेंगे ,,

गंदे-बुरे विचारों से भी
अपना ध्यान हटा लेंगे ,
परिवेश को साफ रखेंगे
नहीं गंदगी पालेंगे ,,

नहीं जागरुक हैं जो लोग
उनको भी समझा लेंगे ,
परिवेश को साफ रखेंगे
नहीं गंदगी पालेंगे ,,

स्वच्छ भारत अभियान को
जीवन में अपना लेंगे ,,
परिवेश को साफ रखेंगे
नहीं गंदगी पालेंगे ,,

*सूरज मुजफ्फरनगरी

मंगलवार, 14 जनवरी 2020

सेना रक्षक है भारत की आन-बान-शान की

सेना रक्षक है भारत की
आन-बान-शान की,
कीमत चुका नहीं सकते हम
सेना के बलिदान की,,

नेताओं पर फूल बरसते
और सेना पर पत्थर...2
चैन से घर में सोते हैं हम
सैनिकों के दम पर
हमको वो मुस्कान है देते
बारूद में जलकर
जिसको जरा भी शक हो
देखे कश्मीर में चलकर
घाटी गवाह है...2
सेना के बलिदान की,
कीमत चुका नहीं सकते हम
सेना के बलिदान की,,

घात लगा करके ही गीदड़
शेरों से टकराते हैं
देख के ऐसे मंज़र शोले
आंखों में भर आते हैं
नेताओं की आंखों में तो
आंसू भी नहीं आते हैं
बहुत सह लिया हम सब ने
अब बांध सब्र के जाते हैं
किसको फिक्र है...2
सेना के बलिदान की,
कीमत चुका नहीं सकते हम
सेना के बलिदान की,,

जब निंदा करने की
सीमा को दिल्ली लांघेगी
जब सेना को हुकुम मिलेगा
जब दिल्ली जागेगी
जब सेना आतंकियों को
चौराहों पर टांगेगी
सिर पर रखकर पैर यहां से
तब दहशत भागेगी
कीमत चुकेगी तब...2
सेना के बलिदान की,
सेना रक्षक है भारत की
आन-बान-शान की,,

सेना रक्षक है भारत की
आन-बान-शान की,
कीमत चुका नहीं सकते हम
सेना के बलिदान की,,

* सूरज मुजफ्फरनगरी

रविवार, 12 जनवरी 2020

चलो आज मिलकर साथ

चलो आज मिलकर साथ
हम करते हैं ये काम ।

ठहरा गंदा पानी सुखा दें
कूड़ा-करकट हटा दें
साफ-सफाई करके
गंदगी को मिटा दें
चलो आज मिलकर साथ
हम करते हैं ये काम ।

वातावरण को साफ करें
पेड़ पौधे लगा दें
प्रदूषण को मिटाकर
भारत को स्वच्छ बना दें
चलो आज मिलकर साथ
हम करते हैं ये काम ।

* सूरज मुजफ्फरनगरी

शनिवार, 11 जनवरी 2020

"मोदी है तो मुमकिन है..."

भारत माता बंधी हुई थी
लोहे की जंजीरों में ।
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में ।। 

हम अपने ही देश में
परदेसी कहलाते थे,
दुनिया हम पर हंसती थी
दुश्मन भी खुशी मनाते थे,,
काश्मीर की घाटी से तो
अमन-चैन को छीना ही,
लालकिले की प्राचीर से
हक भी छीनें जाते थे,,
मांओं से बेटे छीन लिए
सरहद पर खींची लकीरों ने,
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में,,
भारत माता बंधी हुई थी 
लोहे की जंजीरों में । 
आंसू-आंसू भरे हुए थे 
भारत की तस्वीरों में ।। 
जाति-धर्म के नाम पर
नफरत की फसल उगाते थे,
सेना के भी शौर्य पर
उंगली बहुत उठाते थे,,
आतंकी के प्रेम में
रात को दिन करने वाले,
आतंकी की मौत पर
मातम बहुत मनाते थे,,
कईं बरस तो राज किया
भारत पर मूक-बधिरों ने,
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में,,
भारत माता बंधी हुई थी
लोहे की जंजीरों में ।
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में ।। 

भारत मां के शेरों को
चूहें भी आंख दिखाते थे,
हाथों में बंदूकें थी पर
गोली नहीं चलाते थे,,
सीने में आवेश तो था पर
दिल्ली का आदेश न था,
देख के ऐसे मंजर हम भी
दांत भींच रह जाते थे,,
म्यान के अंदर समय बिताया
तेजधार शमशीरों ने,
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में,,
भारत माता बंधी हुई थी
लोहे की जंजीरों में ।
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में ।। 

जिनके कदमों की थाप से
पर्वत तक हिल जाते थे,
गद्दारों की शह पर वो
धोखे से मारे जाते थे,,
निंदा करने की नौटंकी
जब दिल्ली में होती थी,
दिलों में शोले उठते थे पर
आंखों से बह जाते थे,,
घाटी अपने लहू से
सींची है भारत के वीरों ने,
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में,,
भारत माता बंधी हुई थी 
लोहे की जंजीरों में । 
आंसू-आंसू भरे हुए थे 
भारत की तस्वीरों में ।। 
काश्मीर के नियम बदलना
इतना भी मुश्किल न था,
पर दिल्ली के दरबारों में
हिम्मतवाला दिल न था,,
गद्दारों से प्यार किया और
अपनों से मुंह मोड़ लिया,
बेघर लोगों की कोई
सुनने वाला दरियादिल न था,,
हिम्मत में कोताही बरती
दिल्ली के वजीरों ने,
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में,,
भारत माता बंधी हुई थी
लोहे की जंजीरों में ।
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में ।। 

लेकिन अब ये लगता है
तकदीर बदलना मुमकिन है,
काश्मीर की घाटी की
तस्वीर बदलना मुमकिन है,,
370, 35-ए की बेड़ियां
भी अब टूट चुकी है,
नामुमकिन सा काम था ये
पर 'मोदी है तो मुमकिन है',,
शहजादों से नहीं हुआ तो
थामा देश फकीरों ने,
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में,,
भारत माता बंधी हुई थी
लोहे की जंजीरों में ।
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में ।। 

शुक्रवार, 3 जनवरी 2020

हम देखेंगे , तुम देखना...

तुम देखना, हम देखेंगे ,
हम देखेंगे , तुम देखना ,,...४

जब 'बर्बादी' चिल्लाने वाले 
वंदे मातरम् गाएंगे ,
और तुष्टिकरण करने वाले
नेता भी खैर मनाएंगे ,,
तुम देखना...
तुम देखना, हम देखेंगे ,
हम देखेंगे , तुम देखना ,,...२

जब भारत मां पर उठने वाले
हाथ उखाड़े जाएंगे ,
और ताज के लोभी जयचदों के
शीश उखाड़े जाएंगे ,,
तुम देखना...
तुम देखना, हम देखेंगे ,
हम देखेंगे , तुम देखना ,,...२

जब साजिश रचने वालों के
सीने फाड़े जाएंगे ,
और मातृभूमि को बेचने वाले
जमीं में गाड़े जाएंगे ,,
तुम देखना...
तुम देखना, हम देखेंगे ,
हम देखेंगे , तुम देखना ,,...२

जब दहशत फैलाने वाले
आग में झोंके जाएंगे ,
और दहशतगर्दों के आका भी
घरों में ठोके जाएंगे ,,

तुम देखना...
तुम देखना, हम देखेंगे ,
हम देखेंगे , तुम देखना ,,...२

जब आतंकियों के पाँव तले से
जमीं खिसकती जायेगी ,
और गद्दारों के अरमानों पर
बिजली सी गिर जायेगी ,,
तुम देखना...
तुम देखना, हम देखेंगे ,
हम देखेंगे , तुम देखना ,,...२

जब देश के टुकड़े बोलने वाले
मुंह पर चांटे खाएंगे ,

और 'तिरंगा' रौंदने वाले
पैर भी काटे जाएंगे ,,

तुम देखना...
तुम देखना, हम देखेंगे ,
हम देखेंगे , तुम देखना ,,...२

जब दुश्मनों के मंसूबों पर
पानी सा फिर जाएगा ,
और भारत की भूमि पर
रामराज फिर आएगा ,,
तुम देखना...
तुम देखना, हम देखेंगे ,
हम देखेंगे , तुम देखना ,,...४

* सूरज मुजफ्फरनगरी