शनिवार, 11 जनवरी 2020

"मोदी है तो मुमकिन है..."

भारत माता बंधी हुई थी
लोहे की जंजीरों में ।
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में ।। 

हम अपने ही देश में
परदेसी कहलाते थे,
दुनिया हम पर हंसती थी
दुश्मन भी खुशी मनाते थे,,
काश्मीर की घाटी से तो
अमन-चैन को छीना ही,
लालकिले की प्राचीर से
हक भी छीनें जाते थे,,
मांओं से बेटे छीन लिए
सरहद पर खींची लकीरों ने,
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में,,
भारत माता बंधी हुई थी 
लोहे की जंजीरों में । 
आंसू-आंसू भरे हुए थे 
भारत की तस्वीरों में ।। 
जाति-धर्म के नाम पर
नफरत की फसल उगाते थे,
सेना के भी शौर्य पर
उंगली बहुत उठाते थे,,
आतंकी के प्रेम में
रात को दिन करने वाले,
आतंकी की मौत पर
मातम बहुत मनाते थे,,
कईं बरस तो राज किया
भारत पर मूक-बधिरों ने,
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में,,
भारत माता बंधी हुई थी
लोहे की जंजीरों में ।
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में ।। 

भारत मां के शेरों को
चूहें भी आंख दिखाते थे,
हाथों में बंदूकें थी पर
गोली नहीं चलाते थे,,
सीने में आवेश तो था पर
दिल्ली का आदेश न था,
देख के ऐसे मंजर हम भी
दांत भींच रह जाते थे,,
म्यान के अंदर समय बिताया
तेजधार शमशीरों ने,
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में,,
भारत माता बंधी हुई थी
लोहे की जंजीरों में ।
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में ।। 

जिनके कदमों की थाप से
पर्वत तक हिल जाते थे,
गद्दारों की शह पर वो
धोखे से मारे जाते थे,,
निंदा करने की नौटंकी
जब दिल्ली में होती थी,
दिलों में शोले उठते थे पर
आंखों से बह जाते थे,,
घाटी अपने लहू से
सींची है भारत के वीरों ने,
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में,,
भारत माता बंधी हुई थी 
लोहे की जंजीरों में । 
आंसू-आंसू भरे हुए थे 
भारत की तस्वीरों में ।। 
काश्मीर के नियम बदलना
इतना भी मुश्किल न था,
पर दिल्ली के दरबारों में
हिम्मतवाला दिल न था,,
गद्दारों से प्यार किया और
अपनों से मुंह मोड़ लिया,
बेघर लोगों की कोई
सुनने वाला दरियादिल न था,,
हिम्मत में कोताही बरती
दिल्ली के वजीरों ने,
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में,,
भारत माता बंधी हुई थी
लोहे की जंजीरों में ।
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में ।। 

लेकिन अब ये लगता है
तकदीर बदलना मुमकिन है,
काश्मीर की घाटी की
तस्वीर बदलना मुमकिन है,,
370, 35-ए की बेड़ियां
भी अब टूट चुकी है,
नामुमकिन सा काम था ये
पर 'मोदी है तो मुमकिन है',,
शहजादों से नहीं हुआ तो
थामा देश फकीरों ने,
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में,,
भारत माता बंधी हुई थी
लोहे की जंजीरों में ।
आंसू-आंसू भरे हुए थे
भारत की तस्वीरों में ।। 

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