सोमवार, 23 मार्च 2020

शायरी_दिल_से


तकनीकी के इस दौर में मन शांत नहीं है।
हर आदमी अकेला है पर एकांत नहीं है।।...1
23/03/2020  6:43 pm

भरोसा खुद पर, ज़हान पर नहीं।
बंदिशें कदमों पर, मुस्कान पर नहीं।।
28/04/2020  9:04 am
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बाप-बच्चों का रिश्ता कितना खास होता है ?
ये बाप के चले जाने पर ही अहसास होता है।
बच्चे आसमां भी छू लें तो बाप से बड़े नहीं हो सकते,
बच्चे बच्चे होते हैं , बाप बाप होता है।
07/05/2023   6:23 pm
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In progress...

शनिवार, 21 मार्च 2020

कोरोना की chain तोड़ो


सभी देशवासियों को सूरज मुजफ्फरनगरी का सादर नमस्कार ! साथियों आज पूरी दुनिया 'कोरोना महामारी' से जूझ रही है। इस संदर्भ में बहुत से लोग अपने-अपने तरीकों से लोगों को जागरूक कर रहे हैं। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए 'कोरोना संकट' पर लोगों को जागरूक करने के लिए अमिताभ बच्चन जी द्वारा अभिनीत फिल्मी गीत 'मेरे देशप्रेमियों' को सम्पादित कर एक गीत लिखा है।
......................

कोरोना की chain तोड़ो,
कोई मिले तो हाथ ही जोड़ो,
भीड़ के पीछे मत दौड़ो,
सावधानी ही सुरक्षा है देश प्रेमियों
देश प्रेमियों
हाथों को clean करो देश प्रेमियों।
मेरे देश प्रेमियों
हाथों को clean करो देश प्रेमियों।

देखो, कोरोना चुपके से आता है।
सोचो, ये वक्त क्या हमसे चाहता है ?
जब भी घर से बाहर निकलो
मुंह पर mask लगा लेना,
कुछ नियमों का पालन करके
सबकी जान बचा लेना,,
लोगों को जागरूक करो।
मेरे देश प्रेमियों
हाथों को clean करो देश प्रेमियों ।
मेरे देश प्रेमियों
हाथों को clean करो देश प्रेमियों ।


साबुन, पानी से हाथों को धो लो।
जब भी कुछ बोलो, दूर से ही बोलो।
फैल न जाए infection
हमें बचना है अनहोनी से,
छींकों, खांसो तो ढक लेना
मुंह को अपनी कोहनी से,,
Sanitizer use करो।
मेरे देश प्रेमियों
हाथों को clean करो देश प्रेमियों ।
मेरे देश प्रेमियों
हाथों को clean करो देश प्रेमियों ।


छोड़ो यात्राएं अभी मस्ती की,मौजों की।
रोको सब राहें इस virus की फौजों की।
पूरब-पच्छिम-उत्तर-दक्षिण
में फैला कोरोना है,
इंसानों के इस दुश्मन को
कुछ इस तरह धोना है,,
घर पर विश्राम करो।
मेरे देश प्रेमियों
हाथों को clean करो देश प्रेमियों ।
मेरे देश प्रेमियों
हाथों को clean करो देश प्रेमियों ।


* जय हिन्द, वंदे मातरम्  🙏
   सूरज मुजफ्फरनगरी
surajmzn13@gmail.com

रविवार, 1 मार्च 2020

ये भारत की नारी है... "नारी_सशक्तिकरण"

नमस्कार !आज की काव्य रचना का विषय है 'नारी सशक्तिकरण'।
नारी सशक्तिकरण अर्थात जीवन के हर क्षेत्र में नारियों को सशक्त बनाना, सक्षम बनाना। चूंकि नारी सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है तो इसका मतलब कहीं न कहीं हमने यह मान लिया है कि भारत की नारियां अभी पूर्ण रूप से सशक्त नहीं है। सोचने वाली बात है कि भारत में हजारों सालों से नारियों की पूजा की जाती है, फिर भी नारी सशक्त नहीं है तो ये चिंता की बात है। लेकिन मेरा व्यक्तिगत रूप से यह मानना है कि भारत की नारियां पहले भी सशक्त थी और आज भी सशक्त हैं।भारत की नारियां किसी भी क्षेत्र में पुरूषों से कम सशक्त नहीं हैं।
इस काव्य रचना की प्रत्येक पंक्ति में एक नाम है,उस नाम से जुड़ा एक महत्वपूर्ण शब्द है, एक कहानी है, एक सच्चाई है और एक अच्छी तुकबंदी है जिससे काव्य रचना देखने में भी अच्छी लगती है।
शीर्षक है...
"ये भारत की नारी है।"
............................
ये भारत की नारी है।
ये कष्टों से नहीं हारी है।
ये त्याग,समर्पण,ममता है।
ये पूजा की अधिकारी है।
ये गंगा जल सी निर्मल है।
ये ज्वाला सी बलकारी है।
ये निर्बल, लाचार नहीं है।
ये दुर्गा अवतारी है।

ये सीता की कुर्बानी है।
ये झांसी की मर्दानी है।
ये पन्ना का त्याग है।
ये हाडी बलिदानी है।
ये विद्योतमा ज्ञानी है।
ये दुर्गा की खुद्दारी है।

ये भारत की नारी है।
ये कष्टों से नहीं हारी है।
ये त्याग,समर्पण,ममता है।
ये पूजा की अधिकारी है।

ये सावित्री का तप है।
ये अनुसूया की पावनता है।
ये संयम फुले का है।
ये मदर टेरेसा की ममता है।
ये महाराणा की चंपा है।
ये झांसी की झलकारी है।

ये भारत की नारी है।
ये कष्टों से नहीं हारी है।
ये त्याग,समर्पण,ममता है।
ये पूजा की अधिकारी है।

ये राधा का प्रेम है।
ये मीरा की भक्ति है।
ये सारंधा की हिम्मत है।
ये चेन्नमा की शक्ति है।
ये पद्मिनी का जौहर है।
ये उदा की चिंगारी है।

ये भारत की नारी है।
ये कष्टों से नहीं हारी है।
ये त्याग,समर्पण,ममता है।
ये पूजा की अधिकारी है।

ये उज्जवला का सागर है।
ये मीठा स्वर लता का है।
ये कल्पना का अम्बर है।
ये प्रेमलता की पताका है।
ये हिमा की रफ्तार है।
ये अवनि की सवारी है।

ये भारत की नारी है।
ये कष्टों से नहीं हारी है।
ये त्याग,समर्पण,ममता है।
ये पूजा की अधिकारी है।

ये मैरिकॉम का मुक्का है‌।
ये कर्णम का दम पक्का है।
ये बबीता का बल है।
ये हरमन का छक्का है।
ये सिंधु का जज्बा है।
ये दीपा की तैयारी है।

ये भारत की नारी है।
ये कष्टों से नहीं हारी है।
ये त्याग,समर्पण,ममता है।
ये पूजा की अधिकारी है।

ये भंवरी का भूचाल है।
ये बानो का हक बाकी है
ये रंग गुलाबी संपत का है।
ये किरण की खाकी है।
ये निर्भया की चींखें हैं।
ये लक्ष्मी का ग़म भारी है।

ये भारत की नारी है।
ये कष्टों से नहीं हारी है।
ये त्याग,समर्पण,ममता है।
ये पूजा की अधिकारी है।
ये भारत की नारी है।
ये व्यवस्था की मारी है।
ये सशक्तिकरण तो संघर्ष है।
ये संघर्ष अभी भी जारी है।

जय हिन्द ! जय भारत ! 🙏
*सूरज मुजफ्फरनगरी

सहायतार्थ :
*विद्योतमा_ महाकवि कालिदास की पत्नी और गुरु
*दुर्गा की खुद्दारी_ रानी दुर्गावती की खुद्दारी
*फुले_ सावित्री बाई फुले
*दीपा_ दीपा कर्माकर
*उज्जवला_उज्जवला पाटिल (नौकायन)
*प्रेमलता_पर्वतारोही प्रेमलता अग्रवाल
*अवनि_अवनि चतुर्वेदी
*लक्ष्मी_लक्ष्मी अग्रवाल(तेजाब कांड पीड़ित)