हम वीर भी हैं, हम धीर भी हैं।
अब लक्ष्य को पहचाना है।
कांटों से भरी राहों पर भी
हमको तो चलते जाना है।
सच की राहों के राही हैं
हम डरते नहीं मर जाने से
झूठ-कपट सब डरते हैं
अब हमसे नज़र मिलाने से
सुख-दु:ख जीवन का अभिन्न अंग
नहीं काम चले घबराने से
संयम में शक्ति बहुत छिपी
हर वक्त टले आजमाने से
संयम से कर्तव्य पालन में
अब हमको लग जाना है
कांटों से भरी राहों पर भी
हमको तो चलते जाना है।
मिल-जुलकर हम कर न सके
कोई ऐसा मुश्किल काम नहीं
सही-गलत न परख सके
हम इतने भी नादान नही
दयाभाव न मन में हो
तो फिर हम इंसान नहीं
और गैरों से जलन रखे
इसमें भी अपनी शान नहीं
लोभ, स्वार्थ और द्वेष भाव को
मन से दूर भगाना है।
कांटों से भरी राहों पर भी
हमको तो चलते जाना है।
वक्त ने हमको आजमाया
अब वक्त को हम आजमाएंगे
सच्चाई की हर दिल में
हम अलख जगाकर जाएंगे
देश-धर्म का दुनिया में
सम्मान बढ़ाकर जाएंगे
भावी पीढ़ी के लिए सुलभ
हम राह बनाकर जाएंगे
संकट चाहे पर्वत सा हो
कदमों में उसे झुकाना है।
कांटों से भरी राहों पर भी
हमको तो चलते जाना है।
हम वीर भी हैं, हम धीर भी हैं।
अब लक्ष्य को पहचाना है।
कांटों से भरी राहों पर भी
हमको तो चलते जाना है।
* सूरज मुजफ्फरनगरी