बुधवार, 26 मार्च 2025

सेवा, सुरक्षा और सुशासन के आठ वर्ष


योगीजी जो कहते हैं वो करके दिखलाते हैं 

सेवा, सुरक्षा और सुशासन हम यूपी में पाते हैं


आठ साल पहले यूपी भी बीमारु प्रदेश था 

'एक जनपद एक माफिया', यूपी में यही निवेश था 

अपराधी पाले जाते थे सत्ता के संरक्षण में 

जनता बेबस थी, मौन थी, पर मन में तो आवेश था 

'एक जनपद एक उत्पाद' , योगीजी चलवाते हैं 

सेवा, सुरक्षा और सुशासन हम यूपी में पाते हैं


बाज न आए निर्बलों की सम्पत्ति कब्जाने से 

बाज़ न आए ईमानदार अधिकारियों को हड़काने से 

कांड बड़े थे प्रशासन की खाल तलक खिंचवाने के 

बोल बड़े थे तनखईंयों से जूते साफ करवाने के 

अब खुद की जान बचाने में उनके जूते घिस जाते हैं 

सेवा, सुरक्षा और सुशासन हम यूपी में पाते हैं।


जनता क्या प्रशासन की भी रिपोर्ट लिखी नहीं जाती थी 

जब ऐसी खबरें सुनते थे तो शर्म हमें भी आती थी 

प्रशासन के हाथ बंधे थे, सिस्टम भी लाचार था 

तुष्टिकरण की सारी ही सीमाएं लांघी जाती थी 

अब हाथ जोड़कर गुंडे खुद को गिरफ्तार करवाते हैं 

सेवा, सुरक्षा और सुशासन हम यूपी में पाते हैं


गुंडागर्दी बदमाशी का तो योगीजी काल बने

आततायी जितने थे उनकी खातिर महाकाल बने 

फौलादी बाज़ू उनके ज्यों होते हैं बुल्डोजर के 

जमींदोज हैं जनता के जी का जो भी जंजाल बने

कहीं गाड़ी पलट न जाए गुंडे इस डर से थर्राते हैं 

सेवा, सुरक्षा और सुशासन हम यूपी में पाते हैं


योगीजी के यही तरीके जनता को भा जाते हैं

जो जिस भाषा में समझता है उस भाषा में समझाते हैं 

जिनके गढ़ थे बने हुए सबको मिट्टी में गाड़ दिया 

छेड़-छाड़ करने वाले अब चलते हुए लंगड़ाते हैं 

अवैध हथियार उठाने वाले, उठते नहीं, उठ जाते हैं 

सेवा, सुरक्षा और सुशासन हम यूपी में पाते हैं...२

योगीजी जो कहते हैं वो करके दिखलाते हैं। 

*सूरज कुमार 

रविवार, 21 जनवरी 2024

राम तो आए...


श्री राम को कहे काल्पनिक

भक्तों पर गोली चलवाए 

राम काज में अड़चन को

वकील दर्जनों गए बुलाए

सख़्त हिदायत थी शासन की

राम का मन्दिर ना बन पाए 

फिर भी देखो राम तो आए

राम तो आए राम तो आए


राम लला को टेंट में भेजा 

खुद महलों में मौज मनाए

तुष्टिकरण में पागल होकर 

धर्म सनातन को ही मिटाए

राम नाम के नारों पर भी

बेईमानों ने बैन लगाए

फिर भी देखो राम तो आए

राम तो आए राम तो आए 


मंदिर जाने वालों पर लड़की

छेड़ने के इल्ज़ाम लगाए

राम के मंदिर से भी दिक्कत  

ना ही उनको राम ही भाए

बेशर्मी की हद तो देखो

राम का न्योता भी ठुकराए

फिर भी देखो राम तो आए

राम तो आए राम तो आए 


राम द्रोही कर रहे बैठकें 

सबको एक ही चिंता खाए

जिसके मन में राम बसे हैं 

उसको कैसे ? कौन हराए ?

वादे किए अयोध्या के और

पूरे भारत राम ले आए

इस रामभक्त से राम बचाए

राम बचाए राम बचाए !

.

.

जय श्री राम 🚩 ...🙏

* सूरज कुमार 

बुधवार, 17 जनवरी 2024

तो कहना...

ये जो तुमसे प्यार करने की गुस्ताखी हो गई ..२

ज़रा इस गुस्ताखी की वज़ह भी सुन लेना

एक बार आईने में खुद को हंसते हुए देखो तो सही

तुमको भी तुमसे प्यार न हो जाए...तो कहना


एक तुम हो जो खुद से ही नाराज़ है..२

एक मैं हूॅं  जिसे तुम पर नाज है

एक बार अपनी खूबियां पहचानो तो सही

तुमको भी तुम पर नाज न हो जाए...तो कहना


मेरी आंखों की भाषा तुम समझ रहे हो..२

शायद मन की अभिलाषा भी समझ रहे हो

एक बार मेरी दीवानगी भी समझो तो सही

तुमको भी मुझसे प्यार न हो जाए...तो कहना


एक बार आईने में खुद को हंसते हुए देखो तो सही

तुमको भी तुमसे प्यार न हो जाए...तो कहना


* सूरज मुजफ्फरनगरी

( शायरी -दिल-से )


शनिवार, 12 अगस्त 2023

मेरी माटी मेरा देश


भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने हाल ही में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में 'मेरी माटी मेरा देश' अभियान की घोषणा की। इस अभियान के अन्तर्गत भारत के स्वतंत्रता सेनानियों और वीर शहीदों की याद में देश भर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

'मेरी माटी मेरा देश' शीर्षक पर मेरी एक काव्य रचना प्रस्तुत है।

मेरी माटी मेरा देश
मेरी माटी मेरा देश ...

घर-घर तक पहुंचा दो
पहुंचा दो ये संदेश
हमें प्राणों से भी प्यारे
ये माटी और ये देश...
जन-जन को समझा दो
समझा दो बात विशेष
साफ़ स्वच्छ रखना है
हमें भारत का परिवेश

मेरी माटी मेरा देश
मेरी माटी मेरा देश ...

मन में उत्साह भर लो
भर लो थोड़ा आवेश
पंच प्रण से कर लो
नये भारत में प्रवेश...
अपनी महान विरासत पर
गर्व करो अभिमान करो 
अंश गुलामी का मन में
कोई रह ना जाए शेष

मेरी माटी मेरा देश
मेरी माटी मेरा देश...

आलस को भी छोड़ो
छोड़ो मौखिक उपदेश
खून पसीने से ही होगा 
विकसित भारत देश ...
आपस के झगड़े छोड़ो
छोड़ो बेमतलब के द्वेष
दुनिया को दिखला दो
हम भारतवासी एक

मेरी माटी मेरा देश
मेरी माटी मेरा देश...

घर-घर तक पहुंचा दो
पहुंचा दो ये संदेश
हमें प्राणों से भी प्यारे
ये माटी और ये देश...

मेरी माटी मेरा देश
मेरी माटी मेरा देश...

*सूरज कुमार 

शुक्रवार, 19 नवंबर 2021

कृषि कानून वापस हो गए तो...

सरकार ने किसान आंदोलन से जुड़े उन तीनों कृषि कानूनों को वापस ले लिया है जो अभी लागू ही नहीं हुए थे। इस बात को लेकर असली किसानों में कितना हर्ष है इसका तो पता नहीं लेकिन कुछ नेताओं की खुशी का ठिकाना नहीं। वे ऐसे खुश हो रहे हैं जैसे किसानों से जुड़ी सभी समस्याओं का निदान हो गया हो। फसलों की खरीद-फरोख्त को लेकर पुराने ढर्रे पर चली आ रही 'बिचौलिया व्यवस्था' को खत्म करने की नेताओं की बड़ी-बड़ी बातें एकदम से गायब हो गई। इसी ज्वलंत मुद्दे पर एक प्रश्नात्मक और व्यंग्यात्मक काव्य रचना प्रस्तुत है जिसका शीर्षक है...

"कृषि कानून वापस हो गए तो..."

......…........................

कृषि कानून वापस हो गए तो...

क्या भूखों मरेंगे "बिचौलिए" ?

क्या जनता भी चिंतामुक्त हुई ?

क्या किसानों के दुःख खत्म हो लिए ? 


क्या किसान न कर्जदार होंगे ?

क्या किसान न आत्महत्या करेंगे ?

वंशवादियों के राज में क्या हाल था ?

इस बात का फैसला तो तथ्य करेंगे !


क्या किसानों की हो जाएंगी मंडियां ?

क्या बिचौलिए छोड़ देंगे पगडंडियां ?

क्या आंदोलनजीवी घर बैठ जाएंगे ?

क्या जला दी जाएंगी देशविरोधी झंडियां ? 


क्या ढर्रे वाला ताम-झाम छिनेगा ?

क्या किसानों को मंडियों में काम मिलेगा ?

क्या वंशवादियों ने कोई सुख दे रखा था ? 

क्या किसानों को सुख वो तमाम मिलेगा ? 


क्या सड़कों पर से जाम खुलेगा ?

क्या यात्रियों को भी आराम मिलेगा ?

क्या राजनीति में फेल पप्पुओं को ,

सफलता का कोई मुकाम मिलेगा ? 


क्या कोई हल निकलेगा मसलों का ?

क्या सही दाम मिलेगा फसलों का ?

क्या हर ओर खुशहाली होगी ?  

क्या °'कल' सुधरेगा °नस्लों का ? 


अगर वाकई ये सब सच होने वाला है।

फिर तो नेताओं का खुश होना बनता है।

राजनीतिक नूरा-कुश्ती है तो मत भूलना ,

नेताओं की भाग्य-विधाता जनता है।


कृषि कानून वापस हो गए तो... 

क्या भूखों मरेंगे "बिचौलिए" ?  

नेताओं ने तो चुप्पी साध ली है ,

°मिया ! आप ही कुछ बोलिए ? 

.............................................

(°कल-भविष्य ,°नस्ल-भावी पीढ़ी

°मिया-मिया खलीफा)

* सूरज 'मुजफ्फरनगरी'

शुक्रवार, 12 मार्च 2021

हम वीर भी हैं, हम धीर भी हैं

हम वीर भी हैं, हम धीर भी हैं।

अब लक्ष्य को पहचाना है।

कांटों से भरी राहों पर भी

हमको तो चलते जाना है। 


सच की राहों के राही हैं

हम डरते नहीं मर जाने से

झूठ-कपट सब डरते हैं

अब हमसे नज़र मिलाने से

सुख-दु:ख जीवन का अभिन्न अंग

नहीं काम चले घबराने से

संयम में शक्ति बहुत छिपी

हर वक्त टले आजमाने से

संयम से कर्तव्य पालन में

अब हमको लग जाना है

कांटों से भरी राहों पर भी

हमको तो चलते जाना है। 


मिल-जुलकर हम कर न सके

कोई ऐसा मुश्किल काम नहीं

सही-गलत न परख सके

हम इतने भी नादान नही

दयाभाव न मन में हो

तो फिर हम इंसान नहीं

और गैरों से जलन रखे

इसमें भी अपनी शान नहीं

लोभ, स्वार्थ और द्वेष भाव को

मन से दूर भगाना है।

कांटों से भरी राहों पर भी

हमको तो चलते जाना है। 


वक्त ने हमको आजमाया

अब वक्त को हम आजमाएंगे

सच्चाई की हर दिल में

हम अलख जगाकर जाएंगे

देश-धर्म का दुनिया में

सम्मान बढ़ाकर जाएंगे

भावी पीढ़ी के लिए सुलभ

हम राह बनाकर जाएंगे

संकट चाहे पर्वत सा हो

कदमों में उसे झुकाना है।

कांटों से भरी राहों पर भी

हमको तो चलते जाना है।


हम वीर भी हैं, हम धीर भी हैं।

अब लक्ष्य को पहचाना है।

कांटों से भरी राहों पर भी

हमको तो चलते जाना है। 


* सूरज मुजफ्फरनगरी

शुक्रवार, 13 नवंबर 2020

सूरज की तरह जगमगाओ

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कल समय की चाल पर भी राज करना,
कल निरुत्तर यह सारा संसार करना।
आज के दिन तुम लाजवाब हो जाओ,
आज तुम 'सूरज' की तरह जगमगाओ।।

कल विघ्नों के समक्ष भी तुम न झुकना,
कल मैं भी रोकूं तो बिल्कुल न रुकना।
आज के दिन तुम मेरे संग ठहर जाओ,
आज तुम 'सूरज' की तरह जगमगाओ।।

कल दुखों को सहज न स्वीकार लेना,
कल मेरे अस्तित्व को भी नकार देना।
आज के दिन मुझसे सारा प्यार पाओ,
आज तुम 'सूरज' की तरह जगमगाओ।।

कल तेज हवाओं के तुम पर कतरना,
कल आंधियों में भी सागर में उतरना।
आज के दिन तुम खुशी के दीप जलाओ,
आज तुम 'सूरज' की तरह जगमगाओ।।

दीपोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं 
🎇🎆✨
link for video
👇
https://youtu.be/ZvBwquMuPYU
..............* सूरज मुजफ्फरनगरी