शनिवार, 1 फ़रवरी 2020

मेरी हैसियत...

माना कि तुम्हारे दिल में है प्यार बहुत..२
मगर मेरे दिल में भी कमी नहीं है।
सच तो यह है कि प्यार किसी एक की
मिल्कियत ही नहीं है।
जो नहीं है उसको भूल जा...२
जो है उससे प्यार कर ।
है दुनिया में खुशी का राज यही
असलियत भी यही है।
एक पल का भी भरोसा नहीं है...२
तुझको तो फिर भी बरसों की आस है।
तेरे ही दिल में छिपा है वो
जिसकी तुझको तलाश है।
सिर्फ एक खुशी है वो...२
और कुछ भी नहीं है।
और तेरी एक खुशी के लिए
मैं बस अपनी जान दे सकता हूं।
इससे ज्यादा "मेरी हैसियत" भी नहीं है।।

*सूरज मुजफ्फरनगरी

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें