#JusticeForSSR पर कविता
14 जून 2020 को बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की खबर सामने आई थी। सुशांत ने आत्महत्या की थी या किसी ने उसकी हत्या की थी यह न्यायिक जांच का विषय है। परन्तु हर भारतीय यह जानना चाहता है कि आखिर सच क्या है ? अब बात सिर्फ सुशांत की हत्या या आत्महत्या की नहीं रही है बल्कि अब बात सत्य और असत्य की है। अब बात न्याय और अन्याय की है। अब बात षड़यंत्रों के दुस्साहस और भारतीय न्यायव्यवस्था में जनता के विश्वास की है। इसमें कोई संदेह नहीं कि जनशक्ति ने इस मामले को गंभीरता से उठाया है वर्ना ज्यादा पुरानी बात नहीं है कि महाराष्ट्र के पालघर में साधुओं की मोब लिंचिंग और दिशा सालियान की मौत की घटनाओं का परिणाम भी हमारे सामने है। मायानगरी मुंबई तो इससे पहले भी बहुत सी चीखों को दबा चुकी है। लोग तो यह भी कहते हैं कि ...
दिखाई नहीं देता मगर
शामिल ज़रुर होता है।
खुदकुशी करने वालों का भी
क़ातिल जरुर होता है।।
सुशांत में कुछ तो खास रहा होगा वर्ना पिक्चर कब की खत्म हो गई होती। ऐसा लगता है कि....
तेरा अस्तित्व सूर्योदय सा है,
कातिलों का अंधेरी रात है।
जिंदा लोगों में नहीं मिलती,
तुझमें अभी भी वो बात है।।
ये मायानगरी दबा चुकी थी,
न जाने कितनी चींखों को ।
कुछ तो तुझमें खास है जो,
न दबा सकी तेरी खामोशी को।।
आक्रोश की ज्वाला जिसमें,
उम्मीद की वो मशाल है तू ।
झूठ की नींव हिला दी जिसने,
सच का वो भूचाल है तू ।।
तेरे कातिल खड़े अकेले हैं,
सारी दुनिया तेरे साथ है।
जिंदा लोगों में नहीं मिलती,
तुझमें अभी भी वो बात है।।
चहुंओर तेरे ही चर्चे हैं,
व्यर्थ नहीं तेरा बलिदान।
तेरे आगे आज सब फीके हैं,
क्या बादशाह? क्या सुल्तान?
ये मायानगरी भांप न पाई,
वक्त की ऐसी चाल है तू ।
परिवारवाद की छाती में,
शूल नहीं एक भाल है तू ।।
पिक्चर तो अभी बाकी है,
यह अंत नहीं, शुरुआत है।
जिंदा लोगों में नहीं मिलती,
तुझमें अभी भी वो बात है।।
......
#JusticeForSSR
* सूरज मुजफ्फरनगरी

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